An Open Letter to Dr. Pravin Togadia

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उसने इशरत का एनकाउंटर कराया। शोहराबुद्दीन का एनकाउन्टर कराया। पूरे गुजरात में चुन चुन कर मुस्लिम आतंकियो और गुंडों का सफाया किया। उसने गोधरा में शहीद हुए कारसेवकों की शहादत का बदला लिया। और इन सबके परिणामस्वरूप उसे लगातार यातना झेलनी पड़ी। उसे कदम दर कदम बेइज्जत किया गया। उसे फसाने के लिए पूरा सरकारी तंत्र उसके पीछे झोंक दिया गया। अनगिनत मामले उसके खिलाफ दर्ज किए गए। लेकिन वो नहीं डिगा एक पल भी, ना झुका। उसे मारने के लिए आतंकियो को मदद देकर भेजा गया। जांच के बहाने घण्टो बैठा कर परेशान किया गया लेकिन वो छिपकर भागा नहीं ना ही वो मरने के डर से कभी रोया। वो अटल रहा, अविचलित रहा, सब सहा, पर किसी के आगे ना कभी झुका, ना कभी अपना दुख नहीं कहा। उसने खुल कर कहा पूरी दुनिया के सामने की वो “हिन्दू राष्ट्रवादी” है और अपनी परम्पराओं पर चलेगा लेकिन सम्मान सबका करेगा। उसने जो किया उसके लिए कभी ढिंढोरा नहीं पीटा।  उसके खिलाफ लोग षड्यंत्र रचते रहे मगर वो किसी बात की परवाह किये बिना चुपचाप अपना काम करता रहा। उसने कभी हिन्दुओं को ये नहीं कहा मैं तुम्हारा नेता हूँ लेकिन बिना कहे उसने अपना फर्ज निभाया। उसने जो करना था वो किया लेकिन दुनिया में हल्ला नहीं मचाया क्योंकि उसका कर्म करने में विश्वास था। उसके समर्थन में एक भी स्वयं को बड़ा हिन्दूवादी कहने वाला नेता नहीं आया। उसके समर्थन में किसी ने कोंग्रेस सरकार के खिलाफ आवाज नहीं उठाई। उसने फिर भी किसी से शिकायत नहीं की ना किसी पर उंगली उठाई। आज उस पर जो आरोप लगाया गया है उसमें नया क्या है उस पर तो सारे विरोधी वर्षों से आरोप लगाते रहे है। सारे विपक्ष सहित दो कौड़ी के कन्हैया कुमार, हार्दिक , उमर खालिद , जिग्नेश मेवानी जैसे समाज के कोढ़ तक यही कहते है वो हमारा एनकाउन्टर करवाना चाहता है। आरोप वर्षो से लगाये जा रहे है और पूरा देश इस बात को समझता है की सारे आरोप फर्जी है। आज जो आरोप लगाया गया उसमें नया कुछ नहीं है पूर्व के आरोपों की एक कड़ी मात्र है। कोई बतायेगा उसने कितने राजनीतिक विरोधियों का एनकाउन्टर कराया अब तक? एक भी नहीं फिर भी रोज उसे नीचा दिखाने का प्रयास किया जाता रहा है। शायद उसकी गलती ये है उसने कभी भीड़ के सामने खड़े होकर ऐलान नहीं किया की वो सिर्फ हिन्दूवादी है, उसकी गलती ये है की उसने कभी भीड़ के सामने खड़े होकर हिन्दुत्व पर रगों में उबाल लाने वाले भाषण नहीं दिए, उसकी गलती ये है की उसने बेवजह की हिंसा को जायज नहीं ठहराया। उसकी गलती ये है वो गद्दी पर आने के बाद देश के संविधान के मुताबिक चल रहा है ना कि एक वर्ग विशेष की मानसिकता के हिसाब से। उसकी गलती ये है की स्वामी विवेकानंद जी के हिन्दुत्व पर चल कर पुनः हिन्दुत्व को दुनिया में पुनर्स्थापित करने का प्रयास कर रहा है। उसकी गलती ये है की वो सनातन धर्म के “वसुधैव कुटुंबकम” के सिद्धांत पर चलकर बेवजह किसी को भी मारने या डराने का समर्थन नहीं करता। उसकी गलती ये है वो जो हिन्दुत्व के लिए करता है या अब तक जो उसने हिन्दुत्व के लिए किया वो सब चीख चीख नहीं कहा। शायद इसी लिए अब कुछ लोग उसे हिन्दूवादी नहीं मानते बल्कि अपना विरोधी समझ रहे है। उसे जरूरत नहीं है किसी सर्टिफिकेट की। वो जानता है उसे क्या करना है , कैसे करना है और कब करना है। कितना भी चिल्लाओ उसे फर्क नहीं पड़ेगा। वो चुपचाप काम करने में यकीन करता है। वो कर्म करने में विश्वास करता है। वो सनातन धर्म में विश्वास करता है, स्वामी विवेकानंद और संघ के सिद्धांतों में विश्वास करता है। इतना काफी है उसके लिए रखो अपना प्रमाणपत्र अपने पास। 
 
वो जो करेगा कहेगा नहीं और जो उसे करना है वो कर के रहेगा।
 
आप मेरे सम्मानीय है मैं आप पर आरोप नहीं लगा रहा ना उंगली उठा बस 
 
मैं आप पर आरोप नहीं लगा रहा बस पूछ रहा हूँ। आप कहाँ थे उस वक़्त? आपने कभी तत्कालीन कोंग्रेस सरकार की इस ज्यादती का विरोध किया ? आवाज उठाई कभी उसके लिए की ये शक्श हिन्दुओं के लिए इतना कर चुका है और अब कभी भी उसकी बलि दी जा सकती है? कभी आपने कोई आंदोलन किया एक हिन्दू के लिए की उसे बलि का बकरा बनाया जा रहा है। आप तो सबसे बड़े हिन्दूवादी नेता है।  कहाँ थे आप, क्या कर रहे थे आप उस समय? मैं बताता हूँ आप कहाँ थे और क्या कर रहे थे। आप यही थे इसी गुजरात की धरती पर थे। मगर एक हिन्दू होने के नाते एक हिन्दू का समर्थन करने की बजाय आप उसी की जड़े काटने की कोशिशों में लगे थे। आप तब भी उसका विरोध करते थे और अनर्गल बयानबाजी करते थे। जिस तरह के बेबुनियाद आरोप कोंग्रेस लगाती थी। वैसे ही आप भी लगाते थे। फर्क सिर्फ इतना था कोंग्रेस उसे मुस्लिम विरोधी बताती थी और आप उसे अपना विरोधी। आप तब भी अपने आपको हिन्दुओ का एकमात्र मसीहा समझते थे और आज भी आप उसी लाइन पर है। विरोधी तब उस पर एनकाउन्टर करा देने के आरोप लगाता था तो आरोप लगाने में कमी आपने भी नहीं रखी थी।
 


आज आप आडवाणी जी को दरकिनार कर दिये जाने का आरोप उस पर लगाते हो, एक बार गिरेबान में झांक लिया होता जब आडवाणी जी जिन्ना की मजार पर गए थे तो उनके खिलाफ आंदोलन किसने किया था अहमदाबाद में। किसने आडवाणी जी को एक पल में हिन्दू विरोधी/ सेक्युलर पता नहीं क्या क्या घोषित कर दिया था। जिसका नतीजा ये हुआ आडवाणी की एक सर्वमान्य हिन्दू नेता की छवि तार तार हो गयी जिसका खामियाजा वो आज तक भुगत रहे है। इसका जिम्मेदार अगर कोई है तो वो आप हो। उसने आपका कभी बुरा नहीं किया था, ना आपने उसका बुरा किया, आप दोनों तो गहरे दोस्त थे ना? फिर ऐसा क्या हुआ की उसके गुजरात का मुख्यमंत्री बनते ही आप रातों रात उसके कट्टर विरोधी बन गए? आपको दिन रात सपना आने लगा वो मेरा एनकाउन्टर करवा देगा। क्या वजह रही होगी? वजह थी राजगद्दी जो आपकी जगह उसे मिल गयी और आपके मन में भल्लाल देव की तरह बाहुबली के प्रति द्वेष पनपने लगा। उससे ज्यादा बुरा आपको तब लगा जब उसने किसी की बंदिशें स्वीकार नहीं की, वो अपने हिसाब से चला। यह आपके अहम को गवारा नहीं हुआ। यही अहम आपको बार बार उसका विरोध करने को मजबूर करता रहा। सारे देश विरोधी, विपक्ष के नेता एक ही राग अलाप रहे है वो हमारा एकांउन्टर करवा देगा। आपने भी वही सुर और ताल छेड़ दिया है। इतने निचले स्तर पर जाकर आरोप? अगर वो इतना खतरनाक है जो अपने विरोधियों का एनकाउन्टर कर देता है तो बताइए आप उसने आज तक अपने कितने राजनैतिक विरोधियों का एनकाउन्टर किया है। बताइये उसने कितने विपक्ष के नेताओं को मरवाया है। इंसान है वो , कोई शार्प शूटर नहीं है जो उसके सामने बोलेगा उसे उड़ा देगा। हंसी आती है आपकी बात पर। एक तरफ आप उसे इतना शातिर बताते है दूसरी तरफ बचकाना सा आरोप लगाते हो जो 5 साल के बच्चे के गले भी नहीं उतर सकता। अगर उसे आपका एनकाउन्टर ही करना होता और उसे लोगों को मार कर राजनीति ही करनी होती तो आपका एनकाउन्टर करने वो पुलिस को भेजने की मूर्खता कदापि नहीं करता। वो सीधा भी आपको जब चाहे खत्म करवा देता और तब उसे वोट का फायदा भी होता। लेकिन किसी को पुलिस से मरवा कर अपने  वोट बैंक का नुकसान कर खुद को सीधे फसा ले इतना मूर्ख तो कोई नहीं होगा शायद। वो तो कदापि नहीं है। 
 
हमें इस बात से इनकार नहीं कि आपने हिन्दुत्व और हिन्दुओ के लिए कुछ नहीं किया। इसके लिए आपके प्रति मन में सम्मान सदैव रहा है और आज भी है। लेकिन आपकी राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं चोर दरवाजे से बाहर मत निकालिए। इसके लिए खुल कर राजनीति में आइये, हिंदूवादी होने का और एक हिन्दू संगठन की आड़ लेकर उसका फायदा मत उठाइये। कम से कम संगठन की गरिमा बानी रहने दीजिए। हमारी नजर में संगठन आज भी सर्वोपरि है। 
 
अपने ही भाई को येन केन प्रकारेण गिरा कर हो सकता है आप ऊपर उठ जाओगे लेकिन उससे हिन्दू समाज को जो क्षति होगी उसे आप कभी पूरा नहीं कर पाओगे। उसका नुकसान आपको भी उठाना ही पड़ेगा। हिन्दुओं में सदा से यही कमी रही है की एक आगे बढ़ता है तो दूसरा हिन्दू ही उसकी टांग खींच कर गिराता है। आप अनुभवी है इस बात को अच्छे से समझते है। आपसे करबद्ध विनती है आपके प्रति मन में जो सम्मान है उसे कम मत होने दीजिए 🙏
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