गुजरात में बेरोजगारी पे कोंग्रेस का झुथ बेनकाब

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गुजरात में चुनाव की रणभेरी बज चुकी है। चुनाव आयोग ने गुजरात मे मतदान की तारीख 9 दिसम्बर एवं 14 दिसम्बर तय की है । जैसे जैसे मतदान की तारीख नजदीक आती जा रही है विपक्ष के झूठे आरोप प्रत्यारोप का दौर अपने चरम पर पहुंचता जा रहा है। कोंग्रेस पार्टी सत्तापक्ष पर रोजगार के मामले पर कई आरोप लगा रही है। कोंग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी रोजगार के मामले में गुजरात की फिस्सडी बता रहे है।  टीम गुजरात ने इन आरोपों की जांच पड़ताल की तो कई आश्चर्यचकित करने वाले तथ्य सामने आये जिनसे पता चलता है की कोंग्रेस चुनाव में गुजरात की जनता को बरगलाने के लिए किस प्रकार झुठ का सहारा ले रही है। टीम गुजरात ने भारत सरकार के श्रम मंत्रालय द्वारा जारी 2015 की रिपोर्ट का अध्ययन किया तो कोंग्रेस के कई झूठ सामने आए। आइये एक नजर डालते है श्रम मंत्रालय की रिपोर्ट पर।

श्रम मंत्रालय की 2015 की रिपोर्ट के मुताबिक पुरे भारत में गुजरात बेरोजगारी के मामले में सबसे अंतिम क्रम पर है। गुजरात मे बेरोजगारी दर मात्र 0.9% है जो की देश मे सबसे कम है। 

गुजरात में 1995-96 में रोजगार कार्यालय द्वारा दी गयी नौकरियां 37000 थी जो वर्ष 2016 में 266000 हो गयी। 

ग्रामीण बेरोजगारी पुरुषों के मामले में 1999-2000 में प्रति हजार 42 थी जो 2015-16 में मात्र प्रति हजार मात्र 10 रह गयी वही महिलाओं के मामले में ग्रामीण बेरोजगारी दर जो 1999-2000 में प्रति हजार 29 पर थी वर्ष 2015-16 में घटकर मात्र 9 हो गयी। 

शहरी पुरुषों में बेरोजगारी दर 1999-2000 में 18 प्रति हजार थी जो 2015-16 में घटकर मात्र 5 पर आ गयी। शहरी महिलाओं की बेरोजगारी की स्तिथि जो वर्ष 1999-2000 में प्रति हजार 24 से घटकर वर्ष 2015-16 में 19 प्रति हजार हो गयी। 

ये आंकड़े बताते है की गुजरात में बेरोजगारी की दर में तेजी से सुधार हुआ है। 

 

पूरे गुजरात के 33 जिलों के लिये फरवरी 2017 में 12 मेगा रोजगार मेलों का आयोजन किया गया जिसमें 2184 नौकरी दाताओं ने भाग लिया और 109520 युवाओं को नौकरी दी गयी। ऐसे रोजगार मेलों का आयोजन गुजरात में भाजपा सरकारों द्वारा पहले भी होता रहा है।

गुजरात सरकार ने वर्ष 2014 से वर्ष 2024 के दौरान  253000 सरकारी एवम अर्धसरकारी कर्मचारियों की भर्ती का कैलेंडर बनाया है । इसमें से 1.53 लाख नौकरियां सरकार में एवम 1 लाख नौकरियां बोर्ड , कॉर्पोरेशन तथा ग्रांटेड संस्थाओं में देने का लक्ष्य है। 

वर्ष 2014 में 36000 एवम 2015 में 20400 नौकरियों पर गुजरात सरकार द्वारा भर्ती की गयी।

वर्ष 2002 से 2014 के दरम्यान 2.61 लाख युवाओं को सरकारी विभागों,पंचायत सेवाओ और बोर्ड निगमों में नौकरियां दी गयी। गुजरात सरकार के 2016-17 के बजट में 66000 सरकारी नौकरियों की घोषणा की गई जिसमें से 17000 पुलिस पदों पर थी। 

GPSC प्रतियोगी परीक्षाओ को गुजराती और इंग्लिश दोनों भाषाओं में लेने का निर्णय गुजरात सरकार द्वारा किया गया । इसके अलावा उच्चतम आयु सीमा 28 वर्ष से बढ़ा कर 30 वर्ष की गई साथ ही GPSC भर्ती मानदंडों में भी सुधार किया गया।

गुजरात सरकार ने राज्य सरकार में नौकरी के लिए उच्चतम आयु सीमा को पांच वर्ष बढ़ा दिया। 30 वर्ष की आयु सीमा को 35 वर्ष और 28 वर्ष की आयु सीमा को 33 वर्ष कर दिया गया। 

गुजरात के सीमावर्ती इलाकों के युवाओं को सुरक्षा बलों में नौकरी मिले इसके लिए बनासकांठा, पाटन और कच्छ के युवाओं हेतु BSF के विशेषज्ञों द्वारा दांतीवाड़ा,गांधीनगर, भुज और गांधीधाम स्थित BSF केम्पस में तालीम देने का कार्य गुजरात सरकार द्वारा शुरू किया गया। 50 युवाओं की एक बेच बनाई गई। ऐसी सभी बेच को 30 दिन की तालीम दरम्यान रहने, खाने यूनिफार्म और शारीरिक शिक्षण का खर्च BSF द्वारा उठाया जा रहा है। परीक्षा से पहले युवाओं हेतु रिफ्रेशर कोर्स की व्यवस्था भी राज्य सरकार द्वारा की गई है। जिन युवकों को उपरोक्त सुविधा के बाद भी अर्धसरकारी बल में नौकरी नहीं मिल पाती उनके लिए सुरक्षा एजेंसियों में नौकरी पाने के अवसर आसान हो जाते है। 

गुजरात सरकार के वाइब्रेंट गुजरात कार्यक्रम में हुवे करार द्वारा अब तक लाखो नौकरियों का सर्जन गुजरात में हुआ है। दिसम्बर 2016 में उद्योगपतियों द्वारा दिये गए आंकड़ो के मुताबिक पिछले वाइब्रेंट गुजरात कार्यक्रम में 2.36 लाख लोगों को नौकरियां तो सिर्फ रिलायंस, एस्सार और वेलस्पन ने ही दी थी। इसके अलावा राज्य में ऑटोमोबाइल सेक्टर में विपुल रोजगार का सर्जन हो रहा है। एक कार बनाने के लिए अनुमानित 25 हजार पार्टस की जरूरत पड़ती है इस हिसाब से देखा जाए तो ऑटोमोबाइल क्षेत्र का हर एक कारखाना विशाल संख्या में लोगों को नौकरी प्रदान करता है।  इसके लिए गुजरात में टाटा मोटर्स, सुजुकी मोटर्स, एम जी मोटर्स और फोर्ड जैसी बड़ी ऑटोमोबाइल कंपनियों के कारखाने गुजरात में विपुल रोजगार का सर्जन कर रहे है। 

उपरोक्त आंकड़े और विश्लेषण से ये साफ हो जाता है की गुजरात मे रोजगार की कोई कमी नहीं है साथ ही पूरे देश मे गुजरात रोजगार देने के मामले में सबसे ऊपर है । कोंग्रेस उपाध्यक्ष झूठ का सहारा लेकर गुजरात की जनता को बरगलाने के साथ साथ देश विदेश में गुजरात को बदनाम करने का काम भी कर रहा है। झूठ फैला कर गुजरात को बदनाम करना गुजरात की अस्मिता और स्वाभिमान को ठेस पहुंचाने से कम नहीं है।

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